पत्र लेखन हिंदी

पत्र लेखन हिंदी एक कला है। चलिए जानते हैं पत्र लेखन हिंदी में कैसे किया जाता है। आज न केबल हम पत्र लेखन हिंदी में सीखेंगे बल्कि कुछ उदाहरण के द्वारा इसे लिखने का प्रयास भी करेंगे, अभ्यास के पश्चात हम इसमें दक्षता प्राप्त कर सकते हैं। साधारणत पत्रों को हम तीन भागों में बाँटते हैं !
(क) व्यक्तिगत-पत्र
(ख) कार्यालयी-पत्र अथवा आवेदन पत्र
(ग) व्यापारिक पत्र

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(क) व्यक्तिगत-पत्र:- (पत्र लेखन हिंदी)

यह पत्र अपने मित्र तथा संबंधी के पास दिये जाते हैं। ये अन्य पत्रों की अपेक्षा बड़े होते हैं। उन पत्रों में सम्बोधन, सम्बन्ध को देखते हुए दिए जाते हैं। पत्र के उपर दाहिनी तरफ अपना संक्षिप्त पता तथा दिनांक लिखते हैं। बाईं तरफ योग्य सम्बोधन देते हुए पत्र प्रारम्भ करते हैं। पत्र के अन्त में दाहिनी तरफ, लिखने बाला अपना नाम लिखता है। बाई तरफ कुछ नीचे की ओर पत्र पानेबाले का पता लिखते हैं। पत्र को आवश्यकता के अनुसार अनुच्छेदों में बांटते हैं। सम्बोधन
(क) पिता तथा बड़ों को पत्र में पूज्य’ सम्बोधन लिखने के पश्चात सादर प्रणाम लिखते हैं। अन्त में आपका’ लिखकर अपना नाम लिखते हैं।
(ख) बड़े भाई अथवा उसी प्रकार के सम्बन्ध बालों, जिनका हम सम्मान करते हों, पत्र के आरम्भ में आदरणीय तथा अन्त में आपका लिखते हैं।
(ग) अपने से छोटों को प्रिय अथवा चिरंजीव लिखने के पश्चात सम्बन्ध तथा शुभाशीष लिखते हैं।
(घ) मित्र को पत्र लिखते समय प्रिय मित्र लिखने के बाद उसका नाम तथा सप्रेम नमस्ते लिखते हैं। अन्त में तुम्हारा लिखते हैं।

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व्यक्तिगत पत्र के कुछ उदाहरण

(1) पुरी जिला स्कूल का रमेश, रानीहाट, कटक स्थित अपने पिता (श्री सोहन) को अपनी व्यक्तिगत समस्याओं से अवगतö

पूज्य पिताजी,          जिला स्कूल, पुरी  

दिनांक : 20.7.23

सादर प्रणाम।  

आपका पत्र मिला । पढ़कर बहुत प्रसन्नता हुई। माँ का स्वास्थय अब अच्छा हो चला है यह जान कर चिन्ता दूर हुई। मैं यहाँ पर अच्छी तरह से हूँ। भगवान से सदैव यही प्रार्थना करता हूँ कि वे आपलोगों को प्रसन्न तथा स्वस्थ्य रखें । मेरी पढ़ाई अच्छी तरह से चल रही है।  

मुझे आपलोगों की याद बहुत आती है। विशेष कर छोटी बहन आशा की याद सताती है। हम जब साथ-साथ रहते थे, तो आपस में लड़ते रहते थे। उससे पढ़ाई में मन लगाने के लिए कह दिजिएगा।  

जबसे मैं यहाँ आया हूँ, तबसे आजतक मेरे कई मित्र बने, किन्तु मैं अपनी तरह खुले दिल के मित्र की तलाश में हूँ। कुछ छात्र पढ़ने के स्थान पर शरारतें करने को ही अपना मुख्य कार्य समझते हैं। मैं उनसे दूर रहने का प्रयास करता हूँ, किन्तु वे मुझे नहीं छोड़ते। मुझे घरके खाने की आदत थी। अब छात्रावास का भोजन रास नहीं आता। आप इसके लिए चिन्तित न हों। मैं अपने को इस माहोल में रमा लूंगा। मुझे कुछ सहायक पुस्तकें खरीदनी हैं। आप सौ रुपये का धनादेश भेज देंगे।  

सबको यथा-योग्य कह देंगे। पत्र की प्रतीक्षा में।  

आपका बेटा  

रमेश 

सेवा में 

श्री सोहन जी,  

रानीहाट, कटक(ओडिशा) 

(2) गोपाल गाँव, बालेश्वर की सौम्या कुमारी चन्द्रशेखरपुर, भुवनेश्वर स्थित अपने बड़े भाई के पास अपनी माताजी के स्वास्थ्य सम्बन्धित जानकारी देते हुये पत्र लिखती है।  

आदरणीय भाई साहब    गोपाल गाँव, बालेश्वर 

नमस्ते।    दिनांक : 20.7.23 

आपका पत्र मिला। पत्र को पढ़कर ऐसा लगा कि आप आवश्यकता से अधिक चिन्तित हैं। वैसे माताजी का स्वास्थ्य जिस प्रकार हो गया था, चिन्ता की बात थी ही, पर अब चिन्ता की कोई बाते नहीं है। भगवान की दया से माताजी  अब अच्छी हो चली हैं। उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। आजकल वे थोड़ा-थोड़ा खाने लगी हैं। चलना भी प्रारम्भ कर दिया है।  

पिताजी तथा घरके अन्य सदस्य अच्छे हैं। सभी आपको याद करते हैं। माताजी भी हमेशा आपकी ही बात करती हैं। सभी आपको यथा-योग्य कह रहे हैं। आपके सभी मित्र माताजी को देखने आये थे।  

माँ कह रही थी कि आप मन लगा कर पढ़ें। परीक्षा के समाप्त होने पर ही यहाँ आयेंगे। वैसे भी आपकी परीक्षा में अब बहुत कम समय रह गया है। मैं हमेशा माँताजी के स्वास्थ्य का समाचार देती रहूँगी। पत्र की प्रतीक्षा में।  

आपकी छोटी बहन  

सैम्या कुमारी 

सेवा में 

श्री राकेश, 

घर सख्या -40,  

भुबनेश्वर-16(ओडिशा) 

(3) कटक की कल्याणी मोची साही, पुरी निवासी अपनी सहेली नजीमा के अपने क्षेत्र में आयी बाढ़ की स्थिति बताते हुये पत्र लिखती है।  

कटक 

प्रिय सहेली नजीमा     दिनांक : 20.7.23 

सप्रेम नमस्ते। 

तुम्हारा पत्र मिला। तुम कटक की बाढ़ से बहुत चिन्तित हो तथा यहाँ का समाचार जानना चाहती हो। भगवान की दया से हमसब बच गये। मैं बिस्तार से इस वाढ़ के बारे में बताती हूँ। पिछले कुछ दिनों से लगातार वर्षा के कारण कटक के गली-मुहल्लों में कुछ पानी भर गया था। महानदी तथा काठजोड़ी अपनी पूर्ण उफान में थी। पिछले रविबार की रात को सब हम सोये, तबतक तो हमें अनिष्ट की कोई आशंका न थी। रात को अचानक मेरे पिताजी ने मुझे जगाया। मैने देखा कि घरमें पानी आ गया था। हमने उसी रात घर का सामान उपरी मंजिल पर पहुंचाया। रात भगवान का नाम ले उपरी मंजिल पर काटते रहे।  

सुबह उठकर देखा कि चारो तरफ पानी ही पानी था। ऐसा लगा जैसे हम समुद्र के बिच किसी नांव में बैठे हैं। तुम्हें तो पता ही है कि मेरा घर नदी के किनारे  कुछ नीचे की ओर है। झोपड़ी में रहनेबालों के घर पूरी तरह डूब गये थे। कुछ लोग ऊँचे टीले पर वैठे थे, तो कुछलोगों ने पेड़ों पर शरण ले रखी थी। जानवर पानी में बह रहे थे। लोगों का सामान भी पानी में बहता चला जा रहा था। बहुत से घर गिर  गये थे।  

उसी समय आकाश में जोरों की आबाज सुनाई दी। मैने देखा वायुसेना का एक हैलिकैपटर उड़ रहा था। देखते ही देखते वह हमारे लिए रसद गिराने लगा। कुछ पावरोटी हमारी छतपर भी गिरि । दोपहर तक सेना की नावें चारो तरफ लोगों को बचाने में लगी थी।  

जैसे-तैसे तीन-चार दिनों में पानी कम हो गया। गली मुहल्लों में कीचड़ तथा गन्दगी के सड़ने के कारण पीने के पानी का अभाव हो गया। मक्खी तथा मच्छरों के प्रकोप से बिमारियाँ फैलने लगी। स्वास्थ्य कर्मचारी आ कर दवा डाल जाते हैं। अब स्थिति सामान्य हो चली है। सबको यथा-योग्य कह देना।  

तुम्हारी सहेली,  

कल्याणी 

सेवा में 

कुमारी नजीमा, 

मोचीसाई,  

पुरी(ओडिशा) 

(4) जूनागढ़, कालाहाण्डी स्थित राम प्रसाद, माष्टरपड़ा, फुलवाणी में रहे अपने भाई हरिप्रसाद को कुसंगति से बचकर रहने का परामर्श देते हुए पत्र लिखता है।  

जूनागढ़, कालाहाण्डी,  

दिनांक : 26.7.23

प्रिय अनुज हरिप्रसाद  

शुभाशीष।  

पिताजी के पत्र से पता चला कि तुम चाचाजी के पास रहने चले गए हो। पिताजी ने तुम्हारे भविष्य को बनाने के लिए ऐसा कदम उठाया है। तुम गाँव में किसी का कहना भी नहीं मानते थे। तुम्हारी मित्रता कुछ शरारती तत्वों के साथ हो गई थी। मैं यहाँ पर-अच्छी तरह से हूँ।  

तुम्हारे भविष्य को ले कर सदा चिन्ता लगी रहती है। पढ़ लिख कर ही हम अपना भविष्य बना सकते हैं। समय बेकार गवाने से कोइ; फायदा नहीं होता। मेरा इरादा भाषण देने का नहीं। तुम्हारी भाभी भी तुम्हारे लिए चिन्तित रहती है।  

अब जावन में तुम्हें अपने को सजाने सबारने का अच्छा अवसर मिला है। तुम चाचाजी के पास रहते हो। वे एक अच्छे शिक्षक हैं। उनसे तुम बहुत कुछ सीख सकते हो । देखो भाई यदि इसबार सम्भल गये तो सब ठीक हो जायेगा। ‘तुम्हारी योग्यता पर मुझे पूरा भरोसा है। तुम जावन में अवश्य सफलता प्राप्त करोगे, यह मेरी कामना तथा प्रार्थना है। बड़ों का कहना मानना । पत्र की प्रतीक्षा में।  

तुम्हारा भाई  

राम प्रसाद 

सेवा में 

श्री हरिप्रसाद, 

माष्टरपड़ा,  

फुलवाणी(ओड़िसा) 

(ख) कार्यालयी अथवा आवेदन पत्र (पत्र लेखन हिंदी) 

ऐसे पत्र साधारणत कार्यालयों के लिए व्यबहार में आते हैं। इसको लिखने में दक्षता प्राप्त करने के लिए हमें अभ्यास की आवश्यकता होती है।  

(1) यह व्यक्तिगत पत्रों की तुलना में छोटे होते हैं।  

(2) इसमें सबसे पहले सेवा में लिखकर, जिसके पास हमें पत्र लिखना होता उसका पद तथा पता लिखते हैं।  

(3) इसमें सम्बोधन श्रीमान्, महोदय आदि लिखते हैं। 

(4) इसमें उच्च कोटि की नम्र तथा भद्र भाषा का व्यवहार होता है।  

(5) अन्त में दायीं ओर भवदीय लिखकर भेजनेवाला अपना नाम तता पता लिखता है। बायीं ओर स्थान तथा दिनांक लिखते हैं। कार्यालयी अथवा आवेदन पत्र के कुछ उदाहरण –

(1) हरेकृष्ण विद्यालय की बुक बैंक से कुछ किताब लेना चाहता है। इसलिए अपने को हरेकृष्ण समझ कर विद्यालय के प्रधान शिक्षक को एक प्रार्थना पत्र लिखो।  

सेवा में  

प्रधानध्यापक, 

ए.जे. ओ. हाईस्कूल 

फुलवाणी(ओड़िसा)।

(वर्ग शिक्षक के द्वारा)  

विषय :- विद्यालय के बुक बैंक से पुस्तको लेनेके लिए आवेदन पत्र। 

श्रीमान्,  

सविनय निवेदन यह है कि मै हरेकृष्ण आत्मज श्री भवानी शंकर कक्षा दसवीं ‘अ’ विद्यालय के बुक बैंक से निम्नलिखित पुस्तक लेना चाहता हूँ।  

(1) दसम गणित 1 प्रति । 

(2) दसम विज्ञान 1 प्रति। 

(3) दसम भूगोल 1 प्रति। 

(4) हिन्दी व्याकरण     1 प्रति।  

               कुल चार पुस्तकें।  

मेरे पिता की आय बहुत कम है। मैं पुस्तकों को खरीद पाने में असमर्थ हैं। अत मेरे प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए मुझे उपरोक्त पुस्तकों को देने की कृपा । की जाय। 

फुलवाणी  आपका आज्ञाकारी छात्र 

दिनांक : 20.7.93      हरेकृष्ण  

कक्षा दसमö ‘अ’ 

ए जे ओ हाईस्कूल,  

फुलवाणी (ओडिशा) 

(2) चन्द्रशेखर पुर के सरकारी विद्यालय का छात्र प्रशान्त कुमार दो दिनों के अवकाश के लिए अपने प्रधान शिक्षक के पास एक आवेदन पत्र लिखता है।   

सेवा में 

प्रधानाध्यापक, 

सरकारी उच्च विद्यालय, 

चन्द्रशेखरपुर, भुवनेश्वर-751016 

(वर्ग शिक्षक के द्वारा)  

विषय :- अवकाश के लिए आवेदन पत्र।

महोदय,  

सविनय निवेदन यह है कि मैं पिछले 10.7.93 तथा 11.7.93 को अपनी अस्वस्थता के कारण विद्यालय में उपस्थित नहीं हो पाया हूँ।  

अत महोदय मेरी अस्वस्थता पर गौर करते हुए उपरोक्त दो दिनों का अबकाश प्रदान करें। 

भुवनेश्वर  आपका आज्ञाकारी छात्र, 

दिनांक : 20.7.22      प्रशान्त कुमार  

कक्षा- अष्टम ‘ख’ 

सरकारी उच्च विद्यालय, 

चन्द्रशेखर पुर,  

भुबनेश्वर-751016(ओड़िसा) 

(3) जोबरा, कटक स्थित महेश बाढ़ के बाद की स्थिति का सामना करने के लिए कुछ सुझाव देते हुए जिला स्वास्थय अधिकारी के पास पत्र लिखता है। 

सेवा में  

जिला स्वास्थ्य अधिकारी,  

कटक। 

महोदय सविनय निवेदन यह है कि पिछले सप्ताह आई बाढ़ के प्रकोप का प्रभाव तो समाप्त हो गया है, किन्तु उसका जमा पानी सड़ रहा है । मुहल्ले के पीने का पानी दूषित हो गया है। मच्छर बीमारियों के कीटाणुओं को फैला रहे हैं। बीमारी के बिकराल रूप धारण करने की आशंका बढ़ गई है।  

हमारे मुहल्ले में स्वास्थ्य कर्मचारी के टीके लगा कर ही अपने कार्यो का अन्त मान लेते हैं। सफाई तथा पीने के अच्छे पानी की अत्यन्त आवश्यकता है। मक्खी-मछर के प्रकोप से बचने के लिए दवा के छिड़काव की आवश्यकता है।  

अत: महोदय हमारे स्वास्थ्य की ओर ध्यान देते हुए उचित कार्यवाही करें। 

कटक      भवदीय 

20.7.22   महेश

     डगरपड़ा, कटक  

(ग) व्यापारिक पत्र  (पत्र लेखन हिंदी)

इस प्रकार के पत्रों से व्यापारिक आदान-प्रदान होता है। यह एक संस्था दूसरे के पास अथवा व्यापारी अपने ग्राहक के पास तथा ग्राहक व्यापारी के पास पत्र लिखता है। यह लगभग कार्यालयी पत्रों की ही तरह होता है। इसमें कार्यालयी पत्रों की तरह भद्र, नम्र तथा नापी-तुली भाषा की आवश्यकता नहीं होती। इसमें साधारण भाषा से कार्य चला लिया जाता है। व्यापारिक पत्र के कुछ उदाहरण –

(1) कालिका देवी साही, पुरी की श्रद्धा कुमारी ओड़िशा राष्टभाषा, परिषद, पुरी की सहायक पुस्तकों को मगंवाने के लिए शबनम पुस्तक महल’ प्रेस छक, लिंक रोड़, कटक-10 के पास एक पत्र लिखती है। 

सेवा में  

व्यवस्थापक, 

शबनम पुस्तक महल,  

प्रेस छक, लिंक रोड़, कटक-10

विषय :-पुस्तक मंगवाने के लिए।  

महोदय,  

मैने आपकी संस्था से छपनेवाली पुस्तकों की सूची पढ़ी। उसमें । निम्नलिखित पुस्तकें मेरे उपयोग की हैं।  

(1) हिन्दी व्याकरण तथा रचना     1 प्रति 

(2) माध्यमिक गाईड    1 प्रति  

(3) बोधिनी गाईड 1 प्रति  

यथा शीघ्र उपरोक्त पुस्तकों को वी. पी. पी. द्वारा भेज दें। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि पुस्तकें अच्छी अवस्था में हों। मैं 10रु. का धनादेश अग्रिम  राशि के रूप में भेज रहा हूँ।  

पुरी  भवदीय 

दिनांक : 20.7.23      श्रद्धा कुमारी  

कालका देवी साही, पुरी 

(2) बांका बाजार, कटक का रमेश कुमार हिन्दी साहित्य की सहायक पुस्तकों को मंगवाने के लिए भुबनेश्वर स्थित प्रशान्त पब्लिशिंग हाउस, 13/26,  एम आई जो – 1 वी. डी. ए. चन्द्रशेखरपुर, भुवनेश्वर-16 के पास एक पत्र लिखता है।  

सेवा में  

व्यवस्थापक, 

प्रशान्त पब्लिशिंग हाउस, 

13/26 एम. आई जो. – 1 चन्द्रशेखरपुर 

भुबनेश्वर – 16 (ओड़िसा)  

विषय :- पुस्तकों का मंगवानां ।

महोदय,   

अखबार में अपकी संस्था से छपनेवाली पुस्तकों की सूची पढ़ी। आपके यहाँ एक से बढ़कर एक पुस्तकें छापी हैं। मुझे निम्नलिखित पुस्तकों की आवश्यकता है।  

1) ओड़िया साहित्य का इतिहास     1 प्रति। 

2) हिन्दी व्याकरण     1प्रति। 

3) अच्छी व्याकरण     1 प्रति। 

4) हिन्दी-अंग्रेजी शब्द  1 प्रति। 

मैं 20 रु का अग्रिम धनादेश अग्रिम राशि के रुप में भेज रहा हूँ। जिसकी संख्या-175 दिनांक 20.7.93 है। पुस्तकें अच्छी अवस्था में हों। पुस्तकों को वी.पी. पी. के द्वारा यथा शीघ्र भेज दें।  

कटक      भवदीय 

दिनांक : 10.09.23      रमेश 

बांका बाजार, कटक।  

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