10 कहावतें हिंदी में

आइए जानते हैं ऐसी 10 कहावतें हिंदी में जिन्हे जानकर अप अचंभित हो जाएंगे। ऐसी 10 कहावतें हिंदी में जो अपने शायद पहले कभी सुनी नहीं होंगी।

10 कहावतें हिंदी में

1.   अपनी गली में कुत्ता भी शेर(अपने घर में कमजोर भी बलवान होता है)- राजेश बाहर तो बिल्ली बना फिरता है, किन्तु घर के सामने शेखी बधारता है। यह तो अपनी गली में कुत्ता भी शेर बनने बाली बात हो गयी। 

2.   अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत (जो समय गुजर गया उसके लिये पछताने से क्या फायदा)- पहले समय को बेकार में गंवाया, फिर बैठकर पछताने से क्या फायदा। यह तो वही बात हुई अब पछताए होता क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। 

3.   आग लगने पर कुआँ खोदना(मुसीबत आने पर उसके समाधान का तरीका सोचना)-साल भर तो पढ़े नहीं, अब परीक्षा के पास आ जानेपर लगे रातों रात पढ़ने । यह तो आग लगने पर कुआँ खोदने बाली बात हुई। 

4.   इस हाथ दें उस हाथ लें (तुरन्त फल का मिलना)- इस हाथ दें उस हाथ लें इसी नियम पर ही व्यापार चलता है। 

5.   काबुल में क्या गधे नहीं होते(हर जगह बुरे भले लोग होते हैं)-तुम ऐसा अभिनय करते हो, जैसे तुम्हारे घर में सभी अच्छे लोग हैं। काबुल में क्या गधे नहीं होते। 

6.   काम का न काज का ढाई शेर अनाज का(निठल्ला)- इस कार्यालय में कुछ ऐसे कर्मचारी हैं, जो कुछ भी काम नहीं करते। यह तो यही बात हुई काम के न काजके ढाई शेर अनाज के। 

7.   काला अक्षर भैंस बराबर(पूरी तरह अनपढ़)– रीता से पढ़ने के लिए कहने से क्या फायदा, उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।  

8.   जो गरजता है सो बरसता नहीं (जो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे उतना काम नहीं करते)-राम पहलबान से मुकाबले की बातें बड़े जोश-खरोश के साथ कह रहा था। जब मुकाबला हुआ, तब पता चला, जो गरजता है सो बरसते नहीं। 

9.   थोथा चना बाजे घना(जो बड़ा दिखावा कहते हैं, वास्तव में वे उतना कर नहीं पाते)- सोहन अपनी अमीरी की बड़ी-बड़ी बखाने करता था। जब उससे 2 रुपये माँगे तब तो दे न सका। थोथा चना बाजे घना।  

10.  दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है(एकबार किसी काम में हानि उठाकर आदमी उस काम को करने का साहस नहीं करता)-बच्चा बार बार हरी मिर्च को लेना चाहता था। एकबार उसने इसे चख लिया। अब देखते ही दूर भागता है। दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है। 

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11.  नीम हकीम खतरे जान(विषय का आधा-अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।)-तुम्हें तो रेडियो बनाना ही नहीं आता, फिर क्यों उसे खोल रहे हो। उसके  अधिक खराब होने की सम्भाबना है। नीम हकीम खतरे जान। 

12. नौ नगद न तेरह उधार(उधार वेचने की अपेक्षा सस्ता वेचना ठीक है।) मैं अपनी वस्तु को उधार बेचने की अपेक्षा सस्ते दाम पर ही बेचना उचित समझता हूँ। यह तो नौ नगद न तेरह उधार। 

13.  बाँझ क्या जाने प्रसव की पीड़ा(जिसने कष्ट न झेला हो, वह उसका असर नहीं जानता)- तुम्हें क्या पता गड्डा खोदने में कितना कष्ट होता है। एकबार खोद कर देखो तो पता चले बाँझ क्या जाने प्रसव की पीड़ा।

14. भागते चोर की लंगोटी भली(जहाँ से कुछ भी मिलने की आशा नहीं, वहाँ से कुछ भी मिलजाय तो अच्छी ही है)-सभी टमाटर गिर कर फूट गये हैं, देखो कुछ बचे हों तो उन्हें उठा लो। भागते चोर की लंगोटी ही भली। 

15.  मन चंगा तो कठौती में गंगा(यदि हमारा मन पवित्र हो ता सभी स्थान पवित्र होते हैं)-क्या मन्दिरों में जा कर कतार में खड़े होते हो, घर में ही पूजा कर लिया करो। मन चंगा तो कठौती में गंगा। 

27. मानो तो देव नहीं तो पत्थर(बिश्वास ही बडी वस्तु है)- मेरी बात पसन्द आये तो उसे अपनाओ, अन्यथा अपनाने की कोई आवश्यकता नहीं। मानो तो देव नहीं तो पत्थर। 

17. मान न मान मैं तेरा मेहमान(जबरदस्ती गले पड़ना)- मोहन को मैने बार-बार मना किया किन्तु वह घर पर आ ही जाता है। यह तो मान-न-मान मैं तेरा मेहमान बाली बात हुई। 

18.  सी जल गई पर बल न गया (नष्ट होने पर भी अपनी अकड़ कायम रखना)-मोहन का राज चला गया, किन्तु पुरानी शान-शौकत अभी भी बनी  हुई है। यह तो रस्सी जल गई पर बल न गया वाली वात हुई। 

19. लड़े सिपाही नाम सरदार का(काम कोई करे नाम किसी का हो) किसी भी काम को करने में सबका मिला-जुला प्रयास होता है, किन्तु नाम मुखिया का होता है। यह तो वही बात हुई लड़े सिपाही नाम सरदार का। 

20. होनहार विरवान के होत चीकने पात(भविष्य के लक्षण पलले से ही दिखाई देने लगते हैं)-मोहन की विशेषतायें बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। बड़ा होकर वह बहुत बड़ा कलाकार बना। होनहार बिरवान के होत चीकने पात।  

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