Akbar and Birbal story in hindi

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Akbar and Birbal story in hindi

Hindi kahaniyan 

 

दोस्तो आपने akabr और birbal की बहुत सी कहानियां सुनी और पढ़ी होंगी आज एक और कहानी आप सब पढ़ने जा रहे हैं।

 

एक बार की बात है Akbar अपने राज्य में राज करता था। एक दिन जब akabr अपने राजदरबार में बैठा था तो उसने अपने सभी मंत्रियों की एक परीक्षा लेने की सोची।

Akbar ने अपने सभी मंत्रियों को अपने पास बुलाया और फर्श पर एक line बनाई और कहा,ये एक लाइन है जिसे बिना छुए और मिटाए छोटी करनी है।देखते हैं कि कौन ये कर पाता है। पर हां याद रहे किसी को भी ये लाइन को छूना नही है और न ही इसे मिटाना है।

सभी मंत्री बारी बारी से आए और खींची हुई लाइन को छोटी करने की कोशिश करने लगे। लेकिन किसी को भी समझ नही आ रहा था की ये कैसे होगा।

कुछ मंत्री तो खड़े खड़े लाइन को देख रहे थे और सोच रहे थे की कहीं बादशाह akbar पागल तो नही हो गए।

 

सबकी बारी आई और कोई उस लाइन को छोटी नई कर पाया। 

अब आई birbal की बारी। Birbal उस लाइन के पास आए और मुस्कुराने लगे। सभी मंत्री birbal ko हंसते हुए देख कर हैरान हो गए। 

Birbal आए और उन्होंने उस लाइन के बराबर में एक और लाइन खींच दी जो की पहले वाली लाइन से बड़ी थी।

Birbal बोले, ये लीजिए बादशाह आपकी खींची हुई लाइन को मैने छोटा कर दिया बिना उसे हाथ लगाए और बिना उसे मिटाए।

Akbar  मुस्कुराते हुए बोले, वाह birbal हमे विश्वास था की ये पहेली भी आप सुलझा लेंगे शाबास।

Akabr ने birbal को शबासी के साथ साथ उपहार भी दिया। और वहां खड़े सभी मंत्री एक बार फिर से birbal का मुंह देखने लगे और कुछ तो उनसे ईर्ष्या भी करने लगे।

Akbar aur birbal ki paanch paheliyan in hindi

बात है जब akbar अपने राज्य में राज करता था एक दिन akbar ko सभी से मजाक करने की सूझी। उसने अपने सभी मंत्रियों को अपने पास बुलाया और उनसे बोला,मंत्रियों आज हम सबकी परीक्षा लेना चाहते हैं क्या आप सभी तैयार हैं?

कुछ मंत्रियों ने सोचा की आज? Akbar तो हमेशा ही एक नई परीक्षा लेने आ जाते हैं और हम सब हमेशा ही हार जाते है जीतता है तो बस birbal! 

तो क्या फायदा हमारी परीक्षा लेने का बस birbal की जी लीजिए ना। पर ये सारी बाते मंत्री मन में ही सोच रहे थे भला किसकी हिम्मत थी जो akbar की बात को न मानता ना चाहते हुए भी सबने हां में जवाब दे दिया।

 

पहली पहेली

 

Akbar ne पूछा, तो बताओ अगर आप अंधेरे कमरे में एक मोमबत्ती, एक लालटेन और एक दिये के साथ है तो सबसे पहले आप क्या जलाएंगे?

 

सारे मंत्री एक दूसरे का मुंह देख रहे थे पर किसी को भी उस पहेली का जवाब नही मिल रहा था। किसी ने बोला मोमबत्ती किसी ने बोला दिया। लेकिन किसी का भी जवाब सही न था।

हार कर सबने birbal से ही पूछा birbal जी अब आप ही इस पहेली का जवाब बताइए।

Birbal akbar के पास गए और बोले, बादशाह akbar मैने आपकी पहेली अच्छे से सुनी परंतु मैं आपको इस पहेली अभी नही दूंगा।

Akabr बोले अभी नही तो कब?? 

Birbal,” बादशाह इस पहेली का जवाब मैं आपको रात को दूंगा।

Akabr, ठीक है birbal रात को मिलते हैं।

रात हुई। बादशाह अपने दरबार में पहुंचे उन्होंने देखा की दरबार में हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा है उन्होंने तुरंत एक सेवक को बुलाया और बोले, यहां आज इतना अंधेरा क्यू है? सेवक बोला,पता नही हुजूर मैं अभी उजाला कर देता हूं। इतना कह कर सेवक ने वहां रखी हुई सारी मोंबतिया और दिए जला दिए।तभी birbal वहां आ पहुंचे और बोले, लीजिए जहांपनाह आपको आपकी पहेली का जवाब मिल गया। 

Akabr,क्या पर कहां मिला तुमने तो कुछ बताया ही नहीं अभी।

Birbal, जहांपनाह जब आप यहां आए थे तब यहां बिलकुल अंधेरा था है ना और जब सेवक ने मोमबत्ती जलाई तो उसको जलाने के लिए उसने सबसे पहले जिसे जलाया वही है आपकी पहेली का जवाब।

Akbar बोले वाह birbal वाह!हम तुम्हारी चतुराई से बोहोत खुश हुऐ।

 

दूसरी पहेली

 

Akbar दूसरे दिन अपने दरबार में थे तब उन्होंने फिर से अपनी पहेली रखी सबके सामने वो बोले, ऐसी कौन सी जगह है? जहां पर सड़क है पर गाड़ी नही,जंगल है पर पेड़ नही, और शहर है पर घर नही?

इस बार भी किसी को कुछ समझ नहीं आया और वो फिर से birbal के पास ही गए birbal दरबार में आए और उन्होंने अकबर से कहा, बादशाह आपकी इस पहेली का जवाब तो यहीं है हम सबके सामने सारे मंत्री एक दूसरे का मुंह देखने लगे पर समझ नही आ रहा था की आखिर जवाब है कहां तभी birbal बोले, वो नक्शा देखिए जहां शहर है पर घर नही है  नदियां है जंगल है लेकिन फिर भी पेड़ नही है और जहां सड़क भी है पर कोई वाहन नही है। यही है आपका उत्तर बादशाह।

Akbar aur सारे मंत्री birbal se अति प्रसन्न हुए और birbal को इनाम भी दिया।

Akabr बोले अब हम अपनी तीसरी पहेली सूर्यास्त के बाद पूछेंगे।

 

तीसरी paheli

 

रात हुई सभी दरबारी दरबार में उपस्थित हुए akabr ने अपनी पहेली पूछी, तो बताइए वो क्या है जिसे आप एक बार खा कर दुबारा नहीं खाना चाहते, मगर फिर भी खाते है।

 

दरबारियों के मन में सभी प्रकार के व्यंजन आ गए और फिर उन्होंने सोचा की ऐसी क्या चीज हो सकती है जिसे हम एक बार खा कर दुबारा नहीं खाना चाहते पर भी खाते है। उन्होंने akbar से कहा, जहांपाह ऐसी तो कोई चीज नहीं है।

तभी birbal बोले,है!

जहांपनाह धोखा! विश्वासघात! यही ऐसी चीज है जिसे हम एक बार खा लेते है तो फिर दुबारा नहीं खाना चाहते लेकिन फिर भी कही न कही किसी न किसी से वो हमे मिल ही जाता है है ना जहांपनाह? 

Akbar, बिलकुल सही जवाब birbal हमे पता था की आप ही इस पहेली का उत्तर दे पाएंगे akabr ने फिर से birbal ki चतुराई के लिए उन्हें एक उपहार दिया।

अकबर,कल प्रातः सब तैयार रहना हम अपनी चौथी पहेली पूछेंगे।

 

चौथी पहेली

सुबह हुई सभी फिर से दरबार में उपस्थित हुए। सबको पता था की इस पहेली का जवाब भी हम नही दे पाएंगे उन्होंने birbal को बुला कर रखा था ताकि वही पहेली का उत्तर दे पाए 

Akabr ने पहेली पूछी, तो बताओ ऐसी कौन सी चीज है जिसे लोग काटते,पीसते हैं और बांटते भी है पर खाते नई है।

बीरबल बोले जहांपनाह चलिए हम कुछ खेल खेलते है आपको आपकी पहेली का जवाब खुद ही मिल ही जाएगा 

Birbal ने ताश के पत्ते लिए और खेलने लगे उन्होंने पी पत्ते काटे और फिर पीसे और फिर बांटे और खेलने लगे akbar ko बहुत गुस्सा आया और वो बोले birbal! हमने तुमसे पहेली का जवाब पूछा है और तुम ये खेल खेल रहे हो।

Birbal मुस्कुराए और बोले, लीजिए जहांपनाह आपको मिल गया आपकी पहेली का जवाब। अकबर, देखो birbal हमे कुछ समझ नही आ रहा है सही से बताओ birbal बोले,देखिए ना जहांपनाह मैने पहले ये ताश के पत्ते काटे फिर पीसे और फिर बाटे लेकिन किसी ने इन्हे खाया तो नही! यही तो है आपकी पहेली का उत्तर ये ताश के पत्ते! 

Akabr ने इस बार भी birbal की खूब तारीफ की और उन्हे उपहार में एक स्वर्ण मुद्रा दी और कहा, सब रात को तैयार रहना हम अपनी पांचवी और आखिरी पहेली पूछेंगे।

 

पांचवी paheli

 

 

रात हुई सब दरबारी पहुंचे अकबर ने पूछा वो क्या है जिससे सब डरते हैं और उसके लिए परिश्रम करते है।

Birbal बोले,ये तो वही है जहांपनाह जो आप अब तक करते आ रहे हैं और हम सब उसी के लिए इतना परिश्रम कर रहे हैं और शायद बहुत से। दरबारी उससे डर भी रहे हैं 

Akabr बोले क्या मतलब! क्या है वो 

Birbal bole, परीक्षा! यही तो है जो आप अभी तक हम सबकी लेते आ रहे हैं जिससे हम डर रहे हैं और जिसके लिए हम परिश्रम कर रहे है क्यू यही है ना आपकी पहेली का जवाब?

Akabr हंसे और बोले हां birbal बिलकुल सही कहा यही है जिससे आप सब इतना डर रहे हैं 

इतना सुन कर सभी हंसने लगे और सबने birbal की खूब तारीफ की बीरबल को अपनी चतुराई का इनाम भी मिला।