haunted station भूतिया स्टेशन Bhutiya story

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  Indian horror भूतिया स्टेशन haunted story kahani in hindi

यह कहानी एक भागलपुर भूतिया रेलवे स्टेशन Bhutiya story की है। जहां लोग रात तो रात दिन में भी गायब हो जाया करते थे। पर आज तक किसी को भी पता न चला कि वो लोग कहां गए। एक रात की बात है दिसम्बर का महीना चल रहा था। कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। एक  शख्स जिसका नाम आर्यन था। वह शहर से औरंगाबाद जा रहा था। धीरे धीरे करके यात्री उस रेल से अपने स्टेशन पर उतर गया थे।  अब आर्यन ही अकेला उस रेल में रह गया था। अगला स्टेशन भागलपुर आने वाला था। आर्यन चुप चाप उस रेल के डब्बे में बैठा हुआ था तभी कुछ देर बाद ही अगला स्टेशन आ गया और रेल वही रुक गई। आर्यन ने सोचा कि मैं भी अब यही उतर जाता हूं शायद यहां से मुझे आगे जाने का कोई साधन मिल जाए। मन ही मन आर्यन ने यह सोचा और उसी स्टेशन पे उतर गया। जब वह रेल से उतरा तो उसने देखा कि ठंड बोहोत ज्यादा है और उसके अलावा वहां दूर दूर तक कोई नही था। आर्यन ने इधर उधर देखा और अपने रास्ते चलने लगा। इतने मे उसे लगा कि दूर अंधेरे मे एक साया खड़ा हुआ था। स्टेशन की हल्की सी जलती हुई लाइट और धुंध की वजह से आर्यन को कुछ साफ दिखाई नही दे रहा था।उसने सोचा वह कौन है जो काफी देर से एक जगह ही खड़ा हुआ है। उसने सोचा शायद उसका वहम है और यह सोच कर उस साए को नजरंदाज कर दिया। और फिर से चलने लगा। जब वह चल रहा था तो उसे लगा कि जैसे कोई उसके साथ साथ चल रहा है। आर्यन ने अपने इधर उधर देखा पर उसे कोई नजर नही आया। आर्यन बोहोत डर चुका था कुछ हिम्मत करके वह आगे चला कि इतने मे किसी ने उसके कान मे धीमे स्वर मे कहा कि बोहोत बड़ी गलती कर दी तुमने इतना बोलकर वह आवाज आना बंद हो गई अब तो आर्यन का पूरा शरीर ठंडा पड़ चुका था। आर्यन ने सोचा कि मैंने सच मे तो यहां रुक कर गलती तो नही कर दी। उसे लगने लगा कि आज उसकी जिंदगी का आखरी दिन न हो। 

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 आर्यन उस अवाज को सुनते ही ठंडा पड चुका था फिर भी उसने हिम्मत की और आगे बढा उसने देखा की बैंच पर एक लडकी अपना समान समेत सिर झुकाए बैठी हुई है। आर्यन को वहाँ अपने अलावा किसी और को देख कर थोडी रहत मेहसूस हुई वह उस लडकी के पास गया और बोला…. तुम कौन हो लडकी ने कोई जवाब नही दिया और सिर झुकाए बैठी रही। आर्यन ने फिर पुछा क्या तुम किसी का इन्तजार कर रही हो तुम्हारे साथ क्या कोई ओर भी है लडकी ने धीमे स्वर मे बोला नही मेरे साथ और कोई नही है। आर्यन उस बैंच पे बैठ कर उस लडकी से बाते करने लगा। आर्यन ने उस लड़की से उसका नाम पुछा तो उस लडकी ने बताया की मेरा नाम शालिनी  है। और मैं यहा से कुछ दूरी पे एक गाँव मे रहती हूँ। आर्यन को वह लडकी काफी कमजोर लग रही थी उसकी आंखे ऐसी लग रही थी की मानो वो बोहोत दिनो से सोई ना हो। इतना बोलते ही वह लडकी बेहोश हो गयी। आर्यन उसके लिये जल्दी से पानी लेने गया काफी दूर चलने के बाद उसे एक दुकान दिखाई दी जहाँ से उसने पानी की बोतल ओर खाने के लिये खाना लिया ओर उस लडकी के पास आया। आर्यन ने बोतल से पानी की कुछ बुंदे लड़की के चेहरे पे डाली जिससे उसे होश आ गया। आर्यन ने उसे खाना देते हुए कहा की ये लो तुम काफी कमजोर और थकी हुई लग रही हो इसलिये मैं तुम्हारे लिये खाना लेकर आया लो इसे खा लो तुम्हे थोडा अच्छा लगेगा। लडकी ने जल्दी से खाना लिया और खाने लगी आर्यन उसे खाते हुए देख कर हैरान रह गया वो ऐसे खा रही थी की मनो बोहोत दिनो से भुखी हो आर्यन को वह लडकी काफी अजीब लगी। उसने सोचा ये सच मे काफी दिनो से भुखी है इसलिये इतनी जल्दी जल्दी खा रही है ओर फिर आर्यन ने उसकी हरकतो को नजरान्दाज कर दिया। खाना खत्म होते ही लडकी ने आर्यन को थैंक्स बोला। फिर आर्यन ने कहा वैसे मैं यहाँ घुमने आया था मैं दिल्ली मे रहता हूँ और मुझे घुमने- फिरने का काफी शौक है। मेरे दोस्त ने बताया की औरंगाबाद घुमने के लिये बोहोत अच्छी जगह है बस इसलिये मैं वहाँ जा रहा था लेकिन किसी कारण मैं इसी स्टेशन पे रुक गया। पहले तो मुझे इस स्टेशन पे काफी अजीब लगा क्युकी यहाँ कोई नही है पर तुम्हे देख कर थोड़ा अच्छा लगा।तुम बताओ कुछ अपने बारे मे। तुम यहाँ इस स्टेशन पे इतनी रात मे क्या कर रही हो। तब शालिनी ने कहा की मैं पास ही के एक छोटे से गावँ  मे रहती हूँ। मेरे पापा एक कार ऐक्सीडेंट मे चल बसे उनके जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मेरी माँ पर आ गयी। कमाई का कोई साधन ना हो पाने के कारण मेरी माँ को बोहोत मेहनत करनी पडती थी। कुछ समय बाद वह काफी बीमार पड़ गयी। हमारे पास पैसे ना होने के कारण उनका ठीक से इलाज ना हो पाने के कारण वह भी मुझे छोड कर चली गयी। 

भूतिया स्टेशन

उनके जाने के बाद में बिल्कुल अकेली हो गई हमारा न कोई दोस्त था और न हीं कोई रिश्तेदार जिसके सहारे मैं वहा रहती इसलिए मैने सोचा कि क्यों न मैं शहर जा कर ही  कोई काम ढूंढ लू ये सोच कर एक रात मैं अपने घर से निकली और यह इस स्टेशन पर आ गई यहां आई तो पता चला कि मेरी ट्रेन लेट है मैंने सोचा कि क्यों न मैं यही रुक कर ट्रेन का इंतजार कर लूं क्योंकि मेरा वापस अपने गांव जाने का बिलकुल भी मन नही था इसी बेंच पर बैठे हुए में सोच रही थी कि काश मुझे कोई जॉब मिल जाए ताकि मैं आराम से शहर में सेटल हो जाऊं  यही सब सोचते सोचते मुझे पता ही नही चला कि कब मेरी आंख लग गई  जब मेरी आंख खुली तो मैंने घड़ी में देखा तो रात के 1:30 बज चुके थे। मैं उठी और इधर उधर घूमने लगी मैं चल ही रही थी की इतने में मुझे कुछ आवाजे मेरे कानो में पड़ी पीछे मुड़कर देखा तो कुछ लड़के शराब के नशे में चूर झूमते हुए मेरी ओर ही आ रहे थे मैं उन्हे देख कर बोहोत डर गई।

पहले से ही यहां मेरे अलावा और कोई नहीं था और फिर ये लोग भी यहां आ गए जब वो लड़के मेरे बोहोत करीब आ गए तब मुझे वहा से भागने में ही समझदारी लगी मुझसे जितना हो सकता था मैं भागी लेकिन वो चार थे आखिरकार उन्होंने मुझे पकड़ लिया मैं अपने आपको बचाने की कोशिश करने लगी मैं चीखी चिल्लाई लेकिन मेरे अलावा कोई और नहीं था जो मेरी आवाज सुन सकता उन लोगो ने मेरे कपड़े फाड़ दिए मन ही मन मैंने सोचा की इन दरिंदो के हाथो से मरने से अच्छा होगा की मैं खुद ही अपनी जान ले लू क्योंकि इन लोगो से में अब बच नहीं पाऊंगी ये सोचते ही मैंने यही इसी रेलवे ट्रैक पर कूद कर खुदकुशी कर ली ।

अकाल मृत्यु होने की वजह से मेरी आत्मा यही भटकने लगी और उन दरिंदो की तलाश करने लगी जिन्होंने मुझे मौत के घाट उतार दिया वो तो मुझे नही मिले लेकिन मैने यह आने वाले हर शक्श को जान से मार दिया इसलिए यहां कोई नहीं आता और जब तक मैं उन चारों को जान से नही मार देती तब तक मेरी आत्मा यही भटकती रहेगी ।ये सब सुनने के बाद तो आर्यन इतना डर चुका था डर से उसका पूरा शरीर सफेद पड़ गया मानो उसके शरीर में खून की एक बूंद न बची हो वो इतना डर चुका था की न तो कुछ बोल पा रहा था और न ही वहा से हिल पा रह था शालिनी ने एक अजीब और बेहद डरावनी हसी देते हुए बोला की तूने भी गलती कर दी जो तू यहां आ गया अब तू भी मरेगा ।

इतना बोलते ही शालिनी ने अपने लंबे नाखूनों से उसके चेहरे पर वार किया और उसे भी मार डाला और 

बोली की कोई नही बचेगा सबको मरना होगा। इतना बोल कर वो गायब हो गयी।

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