खरगोश और कछुआ hindi story for kids

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Rabbit and tortoise story in hindi

Hindi kahaniyan

खरगोश और कछुआ की कहानी-1

 

एक जंगल में कछुआ और खरगोश दो दोस्त रहते थे।दोनो में गहरी मित्रता थी एक बार खरगोश और कछुआ दोनो नदी के किनारे बैठे थे तभी कछुआ बोला

खरगोश भाई इस जंगल में सबसे बहादुर कौन है?

खरगोश बोलता हैं की सबसे बहादुर तो शेर राजा ही हैं

कछुआ, अच्छा और सबसे तेज और चालाक कौन है?

खरगोश बोला की सबसे चालाक तो लोमड़ी बहन हैं

कछुआ बोला हा पर आज तक इस जंगल में कभी किसी की प्रतियोगिता नही हुई न क्यू ना हम दोनो में ही एक दौड़ की प्रतियोगिता हो जाए।

खरगोश हंसा और बोला क्या?

तुम्हारी और मेरी दौड़ प्रतियोगिता! तुम कछुए हो को इतना धीरे धीरे चलते हो की जंगल के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में तुम्हे 5 दिन लगे जाए और तुम मुझसे प्रतियोगिता करना चाहते हो रहने दो!

तुम हार जाओगे अरे खुद को देखो जो तेज चल तक नहीं पाता वो दौड़ेगा कैसे और अगर तुम दौड़ भी गए तो जीत नही पाओगे मुझसे।

कछुआ बोला, भाई पहले प्रतियोगिता तो हो जाए उसके बाद तय हो जाएगा की कौन हारेगा और कौन जीतेगा।

खरगोश, तय तो हो चुका की मैं ही विजेता हू लेकिन तुम्हारी तसल्ली के लिए हम प्रतियोगिता कर ही लेते हैं।

प्रतियोगिता का दिन आया कछुआ और खरगोश आए सारे जानवर भी उनकी दौड़ देखने वहां पहुंचे। सबको पता था की खरगोश ही जीतेगा लेकिन कछुआ सोच रहा था की आज तो मैं दिखा ही दूंगा की में भी दौड़ जीत सकता हूं।

चूहे ने लाल झंडी दिखा कर दौड़ शुरू करने। का इशारा किया खरगोश और कछुआ दौड़ने लगे खरगोश तो तेज दौड़ने के कारण जल्दी जल्दी आगे बढ़ने लगा लेकिन बेचारा कछुआ धीरे धीरे चलने की वजह से बहुत पीछे रह गया।

कुछ समय बाद खरगोश ने देखा की वो बहुत ज्यादा आगे आ चुका है और कछुए का तो कोई नामो निशान तक नही है दूर दूर तक ऐसे तो दौड़ने में मजा ही नही आ रहा पता नही कब तक पहुंचेगा ये कछुआ तब तक एक काम करता हूं यहीं एक पेड़ के नीचे थोड़ा आराम ही कर लेता हूं। वैसे भी उसको बोहोत समय लगेगा मेरे तक पहुंचने में ये सोच कर खरगोश वहीं एक पेड़ के नीचे लेट गया सुहावना मौसम था  और हल्की हल्की हवा चल रही थी खरगोश ने अपनी आंखें बंद कर ली और बोला बस आंखे बंद कर लेता हूं सोऊंगा नही ये कह कर खरगोश आंख बंद करके लेट गया और न चाहते हुए भी उसको वहां नींद आ गई।

काफी समय के बाद कछुआ वहां आ ही गया और उसने देखा की खरगोश तो आराम से गहरी नींद में सो रहा है वो बोला, चलो इसको सोने देते हैं और मैं अपनी दौड़ पूरी कर लेता हूं कछुआ चलते चलते  खरगोश से भी आगे निकल गया

 

जब खरगोश को होश आया तब उसने देखा की कछुआ अभी तक वहां नही पहुंचा है उसने सोचा की है भगवान ये कितना ज्यादा आलसी है इतना धीरे भी कोई चलता है भला

मुझे क्या मैं तो अभी भी बड़े आराम से दौड़ कर प्रतियोगिता जीत सकता हूं ये सोच कर खरगोश धीरे धीरे चलने लगा उसको लग रहा था की कछुआ अभी उसके पीछे है जब खरगोश थोड़ा और आगे गया तो उसने देखा की लेट लतीफ कछुआ तो प्रतियोगिता की रिबन को तोड़ने वाला है अब कोई चारा नहीं था खरगोश के पास कछुए ने थोड़ा चल कर ही रिबन तोड़ दी और बेचारा खरगोश उसका मुंह ही देखता रह गया अब खरगोश हार तो चुका ही था बल्कि अब तो उसका घमंड भी टूट चूका था सभी जानवरों ने कछुए का विजय सत्कार किया और सब बहुत खुश हुए।

 

 

The rabbit and the tortoise 

खरगोश और कछुआ-2

हिंदी कहानियां

 

एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे जंगल में पीकू नाम का एक कछुआ रहता था। वह तालाब में या फिर कभी बाहर आता इधर उधर घूमता और मौज मनाता ।

 

एक बार की बात है जब कछुआ तलाब में तैर रहा था,तो उसने देखा की एक खरगोश वहां से जा रहा है पर वो खरगोश उस जंगल का तो नही लग रहा था ।

वो तलाब से बाहर आया और खरगोश से पूछा, भाई तुम कौन हो? क्या तुम कही दूर से आए हो?

क्योंकि मैने तो तुम्हे यहां पहले कभी नही देखा।

खरगोश, हां भाई कछुए मैं यहां इस जंगल का नही हूं मैं बहुत दूर से आया हूं परंतु अब यहीं रहना चाहता हूं मेरा वहां कोई नही है सब मुझे पकड़ना चाहते हैं मुझे मारना चाहते हैं इसलिए मैं अब इसी जंगल में तुम सब के साथ रहना चाहता हूं।

कछुआ बोला, कहां से आए हो तुम क्या हुआ है तुम्हारे साथ मुझे बताओ।

तब खरगोश बोला मैं एक शहर से आया हूं मैं एक घर में रहता था वहां के लोग मुझे खाने को नही देते थे वहा के बच्चे मेरे साथ बहुत देर तक खेलते मैं जब थक जाता था फिर भी वो लोग मुझसे खेलते रहते।

और उसके बाद भी मुझे खाना नही दिया जाता कभी कभी ही मुझे थोड़ा खाने को और बाहर घूमने ले जाया जाता था लेकिन मुझे वहां बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता क्योंकि मेरे जैसा वहां और कोई नही था मैं बहुत अकेला रहता इसलिए एक दिन मैं वहां से भाग निकला और यहां इस जंगल में आ पहुंचा।

मुझे यहां आने के बाद सच में बहुत अच्छा लगा मैने तो पहली बार इतना बड़ा जंगल पेड़ नदियां ये सब देखें हैं अब मैं यहां से कभी नही जाऊंगा।

कछुआ बोला, हां भाई खरगोश अब तुम यहां रह सकते हो ये जंगल और यहां के सभी जानवर हम सब तुम्हारे दोस्त हैं चलो मैं तुम्हे अपने दोस्तो से मिलवाता हूं।

कछुआ और खरगोश दोनो एक मुर्गे के पास गए कछुआ बोला, मुर्गे भाई देखो आज इस जंगल में एक नया मेहमान आया है जो आज से मेरा खास दोस्त है।

मुर्गा बोला वाह भाई कछुए तुम्हारी तो लॉटरी लग गई चलो अच्छा है रहो तुम दोनो साथ में ये कह कर मुर्गा हंसता हुआ वहां से चला गया।

 

उसके बाद कछुआ एक बंदर के पास गया और बोला, देखो भाई बंदर आज एक नया मेहमान आया है जंगल में स्वागत करो इसका आज से ये मेरा दोस्त है ।

 

बंदर भी मुर्गे की तरह मुंह बनाते हुए बोला, तुम्हारा दोस्त है ये तुम करो इसका स्वागत हम क्यों करें देखते हैं ये दोस्ती कितने दिन की है और वो भी वहा से चला गया।

खरगोश तो बेचारा समझ ही नही पाया की ये सब ऐसा क्यों कह रहें हैं। और फिर वो दोनो भी वहा से चले गए और वापस तलाब के किनारे आकर बैठ गए।

 

अब कछुआ और खरगोश साथ साथ रहते साथ ही खेलते और मस्ती करते थे।

 

लेकिन ये सब एक चालाक लोमड़ी देख रही थी की वो कछुआ जिसके पास आज तक कोई जानवर नही गया जो उसके साथ कभी नही खेला आज ये खरगोश कहां से आ गया। मुझे कुछ करना पड़ेगा। लोमड़ी ने एक योजना बनाई और तब तो वो वहां से चली गई लेकिन वो बस एक मौके का इंतजार कर रही थी की कब मैं इन दोनो को अलग करूं।

 

एक बार की बात है खरगोश और कछुआ दोनो ही नदी के किनारे खेलने के बाद काफी थक गए और वहीं बैठ गए।

कछुआ बोला, खरगोश खरगोश! क्यों ना हम इस तलाब से मछलियां पकड़े देखते हैं कौन जीतता है।खरगोश बोला इसमें देखना क्या हैं में ही जीतूंगा और कौन जीतेगा भला!

कछुआ बोला ठीक है जिसने 5 मछलियां पकड़ी वही विजेता होगा। खरगोश बोला ठीक है!

यह कह कर दोनो मछली पकड़ने लगते हैं

खरगोश के हाथ 3 मछलियां आती हैं पर कछुए के हाथ पूरी 5 मछलियां आ जाती हैं।

ये देख कछुआ बोला देखा कहा था ना मैने मैं ही जीतूंगा बड़े आए मुझसे जीतने वाले हार कर कैसा लगा खरगोश भाई इतना कह कर कछुआ हंसने लगा कछुआ तो बस खरगोश के साथ मजाक ही कर रहा था लेकिन खरगोश को ये बात बिलकुल भी अच्छी नही लगी उसे बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि कछुए ने उसे हरा कर उसके घमंड को भी तोड़ दिया था।

खरगोश झटके से वहां से उठा और बोला हा हा देख लिया की तुम जीते हो इतना खुश होने के भी जरूरत नहीं है ये कह कर खरगोश वहा से चला गया। वहीं दूर खड़ी लोमड़ी ने ये सब देख लिया और आखिरकार उसे वो मौका मिल ही गया जिसकी उसे तलाश थी।

 

वो खरगोश के पास गई और बोली, क्या हुआ खरगोश तुम इतना परेशान क्यों हो तुम्हारी लड़ाई हो गई क्या तुम्हारे दोस्त से??

 

खरगोश,नाम मत लो उसका वो नही है मेरा कोई दोस्त अगर होता तो मुझे हराता नही। लोमड़ी बोली, हां भाई सही कह रहे हो तुम तुम्हे तो उसके साथ रहना भी नही चाहिए अरे तुम अपने आप को देखो तुम इतने सुंदर हो तुम्हारे ये छोटे से दांत बड़े बड़े कान और तो और तुम इतना तेज भागते हो और उस कछुए को देखो ठीक से चल भी नहीं पाता तुम्हारी और उसकी दोस्ती। का तो कोई मेल ही नही है।

यह कह कर चालाक लोमड़ी वहां से चली गई और खरगोश उसकी बातो में आ गया।

 

अब वो कछुए के साथ नही दिखता था अब वो बाकी जानवरो के साथ रहने लगा और कछुए से दूरी बनाने लाग बाकी जानवरो के साथ रहते रहते खरगोश को बहुत घमंड होने लगा अब वो कछुए को कुछ न समझता। ऐसे ही एक बार खरगोश पेड़ के नीचे आराम करने लगा तभी वहां कछुआ आया और बोला , भाई खरगोश अब तुम मुझसे बात क्यों नही करते क्या किया है मैने अब न तो तुम मुझे देखते हो न मेरे साथ खेलते हो मुझे तुम्हारे बिना बिल्कुल अच्छा नही लगता।

 

खरगोश बोला तो मैं क्या करूं और ये अपना ढोंग बंद करो कोई दोस्त नहीं हो तुम मेरे अगर होते तो मुझे उस दिन हराते नही और वैसे भी अब मैं तुम्हारे साथ नही रहना चाहता मैं इतना सुंदर हूं और तुम!

 

इतने बदसूरत हो मुझे अब तुमसे कोई बात नही करनी जाओ यहां से उदास कछुआ वहां से चला गया

 

कुछ दिनो बाद जंगल में अचानक आग लग गई सारे जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे कई तो उस आग में आकर मर गए और कुछ अपनी जान बचा कर दूसरे स्थान पर चले गए खरगोश को समझ नही आ रहा था की वो कहां जाए बड़ी मुश्किल से वो अपनी जान बचा कर दूसरे जानवरो के पास गया और बोला कृपया करके मुझे भी अपने साथ ले लीजिए मेरा क्या होगा?!

लेकिन किसी ने भी खरगोश को अपने साथ नही लिया और कहने लगे की जाओ यहां से यहां अपनी जान बचाना ही मुश्किल हो रहा है तुम्हे कैसे बचाएंगे जाओ निकलो यहां से बेचारा खरगोश अब उसको कोई भी अपने साथ रखने को तैयार नहीं था।

तभी कछुए ने देखा की खरगोश आग में जलने वाला है जिसका उसे ध्यान ही नही है कछुआ उसके पास गया और बोला, जल्दी से मेरी पीठ पर बैठ जाओ मैं तुम्हे यहां से कही दूर ले जाऊंगा नही तो यहां तुम मर जाओगे चलो मेरे साथ खरगोश कछुए की पीठ पर बैठ गया और कछुआ उसे अपने साथ तलाब में ले गया क्योंकि आग पानी तक तो नही आ सकती। खरगोश को अपने किए पर बोहोत गुस्सा आ रहा था उसने खरगोश के सामने हाथ जोड़ कर बोला, मुझे माफ कर दो कछुए मैने तुम्हारा इतना मजाक उड़ाया तुम्हारे साथ इतना दुर्व्यवहार किया फिर भी तुमने मेरी जान बचाई कछुए ने बोला कोई बात नही इस बहाने तुम्हे ये तो पता चला की कौन तुम्हारा अपना है और कौन पराया।  उसके बाद दोनो खुशी खुशी रहने लगे।

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