दो पक्के दोस्त Hindi kahaniyan

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दो पक्के दोस्त best friends story in hindi

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जमशेद पुर नाम के गांव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम अर्जुन और दूसरे का नाम अभय था।

वो दोनो एक दूसरे के साथ बचपन से थे और एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।

उनके मां बाप बचपन में ही उन दोनो को छोड़ कर चले गए थे तभी से वो दोनो एक दूसरे का सहारा थे काफी बड़े होने के बाद एक दिन अभय ने अर्जुन से बोला, अर्जुन हम अब बड़े हो गए हैं अभी तक तो गांव वाले हमे खाने को कुछ न कुछ खाने को दे दिया करते थे लेकिन अब तो वो लोग भी देखेंगे कि हम कुछ काम करने के योग्य हो गए हैं और उसके बाद भी हम यूं खाली बैठे हैं तब तो वो भी हमसे मुंह मोड़ लेंगे।

 

अर्जुन बोला, हां दोस्त तुम सही कह रहे हो अब हमे कोई काम ढूंढ लेना चाहिए।पर हम करेंगे क्या!??

 

अभय, देखते हैं कुछ न कुछ तो करने को मिल ही जाएगा आज रहने देते हैं पर कल सुबह ही निकल जायेंगे काम की तलाश में!

अर्जुन और अभय उस दिन खाना खा कर सो गए।

और अगले दिन _____

 

अर्जुन और अभय गांव में निकले बहुत जगह काम ढूंढने के बाद भी जब उन्हें कुछ न मिला तब वो दोनो एक पेड़ के नीचे थक कर बैठ गए।

अभय, अर्जुन बोहोत ढूंढा पर हमारे लायक तो किसी के पास कोई काम नही हैं अब हम क्या करेंगे!?

अर्जुन, कोई बात नही यार मिल जाएगा इतनी जल्दी किस बात की है चलो आज घर चलते हैं कल फिर आयेंगे और इस बार हम दूसरे गांव में जा कर काम ढूंढेंगे ठीक है ना!

 

ठीक है चलो! अभय ने बोला।

दोनो अपने घर जा ही रहे थे की उन्होंने देखा की एक आदमी ट्रक से कुछ बोरियां निकालने के लिए खड़ा है और वो थोड़ा परेशान भी लग रहा था!

वो दोनो उस आदमी के पास गए और बोले, क्या हुआ साहब कोई परेशानी है?

आदमी बोला, हां ये बोरियां निकालनी है पर इसे निकलने के लिए में काफी नही हूं और न जाने मजदूर भी कहां गए?

अर्जुन और अभय को मानो एक मौका ही मिल गया था कुछ काम करने का उन दोनो ने झट से कहा, हम हैं न हम निकाल देंगे और आप बदले में इसकी मजदूरी हमे दे दीजिएगा।

आदमी बोला ठीक है पर आराम से उतारना सारी बोरियां अंदर बोहोत कीमती सामान है।

उन दोनो ने मिल कर वो सारी बोरियां उतार दी और फिर उस आदमी के पास अपनी मजदूरी लेने गए

मजदूरी देने के बाद जब वो दोनो जाने लगे तो उस आदमी ने उन्हें रोकते हुए कहा, क्या करते हो तुम!?

अर्जुन ने कहा, कुछ नही साहब अभी तो बस काम की ही तलाश मे हैं।

मेरे यहां काम करोगे? आदमी ने पूछा!

देखो तुम्हे इसी तरह ट्रॉली भर कर समान उनके पते पर पहुंचाना होगा और फिर शाम को अपने पैसे ले लिया करना बताओ मंजूर है?

उन दोनो ने फटाक से हामी भर दी।

अब वो दोनो वो काम करने लगते हैं और अब पैसे होने से वो अच्छा खाना खा पा रहे थे अच्छे कपड़े पहन पा रहे थे और साथ ही वो आने वाले समय के लिए पैसे बचा भी रहे थे।

ऐसे ही एक दिन वो समान ले जा रहे थे उस दिन तो आसमान में घने बादल छाए हुए थे और बारिश होने की पूरी आशंका थी। पर वो दोनो तब भी अपने काम से पीछे नही हटे और समान डिलीवर करने निकले लेकिन रास्ते में ही तेज तूफान और बारिश शुरू हो गए जिसके कारण उन्हें कुछ भी ठीक से दिखाई नही दे रहा था तभी सामने से एक बड़ा ट्रक उनकी ट्रॉली टकरा गया जिससे उनकी ट्रॉली पलटी गई ।

उस हादसे में अभय की दोनो टांगे चलो गई और अर्जुन की दोनो आंखें ।

वो जब अस्पताल से घर आए तब उन्होंने कहा की हे भगवान! ये क्या हो गया अब हम क्या करेंगे कैसे अपना जीवन काटेंगे??

अर्जुन बोला, होनी को कौन टाल सकता है जो होना था वो हो ही गया अब एक काम करते हैं जो हमने अपनी कमाई से पैसे बचा कर रखे थे उन्हीं में से गुजारा करेंगे।उसके बाद देखा जायेगा।

अब वो दोनो फिर से खुशी से रहने लगते हैं लेकिन एक रात गांव में चारो ओर आग लग जाती है लोग अपने घरों से निकल निकल कर सुरक्षित जगह पर जाने लगते हैं अर्जुन और अभय बोलते हैं ये क्या हो गया अब हम कैसे निकलेंगे यहां से कहां जाएंगे।

आग उन दोनो के बहुत करीब आने वाली होती है तभी, अर्जुन ने कहा ऐसे काम नही चलेगा अब एक ही रास्ता है हमारे पास मैं तुम्हारे पैर बन जाता हूं और तुम मेरी आंखें बन जाओ आओ मेरे कंधो पर बैठ जाओ और मुझे यहां से निकलने का रास्ता बताते रहना।

अभय उसकी पीठ पर बैठ जाता और उसे रास्ता बताता है।

और इस तरह दो दोस्तो ने एक दूसरी की जान बड़ी समझदारी और हिम्मत के साथ बचाई।

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