ऊंट और सियार की कहानी

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ऊंट और सियार की कहानी 

The camel and the jackal

Hindi kahaniyan

एक बार की बात है एक ऊंट और एक सियार दोनो दोस्त थे। 

एक दिन उन्हे बोहोत भूख लगी ऊंट बोला , भाई सियार बोहोत तेज भूख लग रही है। क्या करें!? 

सियार बोला हां भाई कबसे हम चलते ही जा रहे हैं पर खाने को कुछ मिल ही नहीं रहा।

फिर वो दोनो चलते चलते एक नदी पर पहुंचे सियार ने बोला अब हम क्या करे। कैसे पार करे ये नदी!? 

ऊंट बोला एक काम करो मेरे पीठ पर बैठ जाओ मैं नदी पार कर लूंगा।


ऊंट ने सियार को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी पार करवा दी।

दोनो चलते चलते फिर एक खेत में पहुंचे। उन्होंने देखा की खेत का मालिक तो खर्राटे मार कर सो रहा है।

मौका देखते ही वो दोनो खेत में घुस गए और अनाज खाने लगे। 

सियार का पेट छोटा होने के कारण जल्दी भर गया और खाने में बाद सियार बोला, ऊंट भाई मेरा पेट तो भर गया अब मुझे उंकार लगानी है। 

ऊंट बोला नही भाई अभी नही अभी तो मैने खाना शुरू ही किया है। थोड़ी देर रुक जाओ!

सियार कुछ समय रुक गया। फिर बोला, भाई अब तो बोहोत देर हो गई है अब मैं नही रुक सकता। 

ऊंट ने कहा, नही रुक जाओ! अगर तुमने ऊंकार लगाई तो खेत का मालिक जाग जायेगा। 

सियार बोला, नही भाई अब मैं बिल्कुल भी नही रुक सकता। 

इतना कह कर सियार ने जोर से ऊंकार लगा दी। जिससे खेत मालिक जाग गया। और जैसे ही उसने देखा की ऊंट उसके खेतो को खा रहा तुरंत डंडा उठा कर उसने ऊंट को पीटना शुरू कर दिया

और चालाक सियार वहां से भाग गया। 

ऊंट बेचारा कैसे ना कैसे करके वहां से निकल गया।

सियार के पास जाकर ऊंट ने कहा, मैने मना किया था ना तुमसे की थोड़ा रुक जाओ फिर भी तुमने ऊंकार लगा दी जिससे मालिक जाग गया और मुझे इतनी बुरी तरह पीट दिया। ऊंट ने सियार से बदला लेने की सोच ली।

दोनो फिर से नदी के किनारे पहुंचे ऊंट को एक तरकीब सूझी। उसने कहा चलो सियार जल्दी से मेरी पीठ पर बैठ जाओ।

ऊंट जैसे ही नदी के बीचों बीच पहुंचा उसने कहा, भाई सियार खाना खाने के बाद मुझे नहाना होता है अब मैं नहाऊंगा। 

सियार बोला, नही ऊंट भाई अभी नही मुझे पहले किनारे तक छोड़ दो फिर तुम नहा लेना। 

ऊंट, ने कहा नही नही भाई मुझे तो अभी नहाना है मैं नही रुक सकता। 

ऊंट ने जैसे ही नहाने के लिए अपना शरीर पानी में डुबाया सियार बेचारा नदी में  गिर गया। 

और ऊंट बाहर निकल गया। 

ऊंट, देखा जैसे करनी वैसी भरनी।

तुमने मुझे पिटवाया मैने तुम्हे नदी में गिराया। अब आते रहना तैरते हुए मैं तो चला।

 

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